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ramayan 5.16.21: यह सुन्दर सीता है, जिसका शरीर सोने के समान सुन्दर है और जो सदैव मुस्कुराकर बोलती है, जो इस दुःख को सहने के योग्य नहीं थी, जो इस यातना को सह रही है।   |   ramayan सर्ग 5.16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.16.21 
सेयं कनकवर्णांगी नित्यं सुस्मितभाषिणी।
सहते यातनामेतामनर्थानामभागिनी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यह सुन्दर सीता है, जिसका शरीर सोने के समान सुन्दर है और जो सदैव मुस्कुराकर बोलती है, जो इस दुःख को सहने के योग्य नहीं थी, जो इस यातना को सह रही है।
 
It is this beautiful Sita, who has a body as beautiful as gold and always talks with a smile, who was not worthy of suffering this tragedy, who endures this torture.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)