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ramayan 5.16.12: इस विशाल नेत्रों वाली सीता के लिए मैंने समस्त नदियों के स्वामी समुद्र को पार किया है और इस लंका नगरी की खोज की है॥ 12॥   |   ramayan सर्ग 5.16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.16.12 
सागरश्च मयाऽऽक्रान्त: श्रीमान् नदनदीपति:।
अस्या हेतोर्विशालाक्ष्या: पुरी चेयं निरीक्षिता॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस विशाल नेत्रों वाली सीता के लिए मैंने समस्त नदियों के स्वामी समुद्र को पार किया है और इस लंका नगरी की खोज की है॥ 12॥
 
For this huge-eyed Sita I have crossed the ocean, the lord of all rivers, and searched this city of Lanka.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)