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ramayan 5.15.9-10h: वहाँ पुन्नाग (श्वेत कमल या नागकेसर), चितवन, चम्पा और बहुवर आदि अनेक सुन्दर पुष्पयुक्त वृक्ष, जिनकी जड़ें बहुत मोटी थीं, शोभायमान थे।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  5.15.9-10h 
पुंनागा: सप्तपर्णाश्च चम्पकोद्दालकास्तथा॥ ९॥
विवृद्धमूला बहव: शोभन्ते स्म सुपुष्पिता:।
 
 
अनुवाद
वहाँ पुन्नाग (श्वेत कमल या नागकेसर), चितवन, चम्पा और बहुवर आदि अनेक सुन्दर पुष्पयुक्त वृक्ष, जिनकी जड़ें बहुत मोटी थीं, शोभायमान थे।
 
Many beautiful flowering trees like Punnaag (white lotus or cobra saffron), Chitavan, Champa and Bahuvar etc., whose roots were very thick, were looking beautiful there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)