Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.15.7-9h: वृक्षों से गिरते हुए सैकड़ों विचित्र पुष्पगुच्छों से सब ओर से प्रकाशित वह भूमि, मानो ऊपर से नीचे तक पुष्पों से ही बनी हो, शोकनाशक अशोक वृक्ष, पुष्पों के भारी भार से झुककर पृथ्वी को स्पर्श करते हुए खिले हुए कनेर के वृक्ष तथा सुन्दर पुष्पों से युक्त पलाश के वृक्ष, अपनी प्रभा के कारण सब ओर से चमकते हुए प्रतीत होते थे। | ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृक्षों से गिरते हुए सैकड़ों विचित्र पुष्पगुच्छों से सब ओर से प्रकाशित वह भूमि, मानो ऊपर से नीचे तक पुष्पों से ही बनी हो, शोकनाशक अशोक वृक्ष, पुष्पों के भारी भार से झुककर पृथ्वी को स्पर्श करते हुए खिले हुए कनेर के वृक्ष तथा सुन्दर पुष्पों से युक्त पलाश के वृक्ष, अपनी प्रभा के कारण सब ओर से चमकते हुए प्रतीत होते थे।
That land, illuminated from all sides by hundreds of strange bunches of flowers falling from the trees, as if made of flowers from top to bottom, the grief-killing Ashoka trees, the blooming oleander trees bending under the heavy weight of the flowers and touching the earth, and the Palaash trees bearing beautiful flowers, seemed to be glowing from all sides due to their radiance. 7-8 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥