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ramayan 5.15.53: "उनके वियोग में भी शरीर को धारण करने वाले भगवान श्री राम शोक से दुर्बल नहीं होते; उन्होंने बड़ा कठिन कार्य किया है।" ॥53॥   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.15.53 
दुष्करं कृतवान् रामो हीनो यदनया प्रभु:।
धारयत्यात्मनो देहं न शोकेनावसीदति॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
"उनके वियोग में भी शरीर को धारण करने वाले भगवान श्री राम शोक से दुर्बल नहीं होते; उन्होंने बड़ा कठिन कार्य किया है।" ॥53॥
 
"Even after their separation, Lord Sri Rama who holds on to His body does not become weakened by grief; He has performed a very difficult task." ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)