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अस्या देव्या मनस्तस्मिंस्तस्य चास्यां प्रतिष्ठितम्।
तेनेयं स च धर्मात्मा मुहूर्तमपि जीवति॥ ५२॥
अनुवाद
इस देवी का मन श्री रघुनाथजी में और श्री रघुनाथजी का मन इसमें लगा हुआ है, इसीलिए यह और धर्मात्मा श्री राम जीवित हैं। यही इनके अल्पायु होने का कारण है।
‘The mind of this Devi is focused on Shri Raghunathji and the mind of Shri Raghunathji is focused on her, that is why she and the virtuous Shri Ram are alive. This is the reason for their short-lived life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥