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ramayan 5.15.49: यह वही सीता है जिसके लिए भगवान राम इस संसार में करुणा, दया, शोक और प्रेम इन चार कारणों से व्यथित रहते हैं॥ 49॥   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.15.49 
इयं सा यत्कृते रामश्चतुर्भिरिह तप्यते।
कारुण्येनानृशंस्येन शोकेन मदनेन च॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
यह वही सीता है जिसके लिए भगवान राम इस संसार में करुणा, दया, शोक और प्रेम इन चार कारणों से व्यथित रहते हैं॥ 49॥
 
This is the same Sita for whom Lord Rama remains distressed in this world for the four reasons of compassion, pity, grief and love.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)