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ramayan 5.15.48: वह श्री रामचन्द्रजी की प्रिय रानी है, जिसका रंग सोने के समान सुन्दर है, जो अदृश्य होने पर भी उनके मन से नहीं गई है॥ 48॥   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.15.48 
इयं कनकवर्णांगी रामस्य महिषी प्रिया।
प्रणष्टापि सती यस्य मनसो न प्रणश्यति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वह श्री रामचन्द्रजी की प्रिय रानी है, जिसका रंग सोने के समान सुन्दर है, जो अदृश्य होने पर भी उनके मन से नहीं गई है॥ 48॥
 
She is the beloved Queen of Sri Ramachandra, with complexion as fair as gold, who even after becoming invisible has not left his mind.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)