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ramayan 5.15.47: यह कपड़ा बहुत समय तक पहने रहने के कारण बहुत पुराना हो गया है, फिर भी इसका पीला रंग फीका नहीं पड़ा है। यह भी उस दूसरे कपड़े के समान चमकदार है। 47.   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.15.47 
इदं चिरगृहीतत्वाद् वसनं क्लिष्टवत्तरम्।
तथाप्यनूनं तद्वर्णं तथा श्रीमद्यथेतरत्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
यह कपड़ा बहुत समय तक पहने रहने के कारण बहुत पुराना हो गया है, फिर भी इसका पीला रंग फीका नहीं पड़ा है। यह भी उस दूसरे कपड़े के समान चमकदार है। 47.
 
This cloth has become very old due to being worn for a long time, yet its yellow colour has not faded. It too is as lustrous as that other cloth. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)