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ramayan 5.15.42: कानों में कुत्ते के दाँतों के आकार के सुन्दर कुंडल और त्रिकर्ण नामक कुण्डलियाँ सुन्दरता से सजाई गई थीं। हाथों में कंगन और अन्य आभूषण थे, जिनमें रत्न और मोती जड़े हुए थे।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.15.42 
सुकृतौ कर्णवेष्टौ च श्वदंष्ट्रौ च सुसंस्थितौ।
मणिविद्रुमचित्राणि हस्तेष्वाभरणानि च॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
कानों में कुत्ते के दाँतों के आकार के सुन्दर कुंडल और त्रिकर्ण नामक कुण्डलियाँ सुन्दरता से सजाई गई थीं। हाथों में कंगन और अन्य आभूषण थे, जिनमें रत्न और मोती जड़े हुए थे।
 
Beautifully made earrings and ear rings called trikarna shaped like a dog's teeth were beautifully placed and decorated in the ears. There were bracelets and other ornaments on the hands, in which gems and pearls were embedded.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)