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ramayan 5.15.40: उस बड़े-बड़े नेत्रों वाली, पतिव्रता और गुणवान राजकुमारी को देखकर उसने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह सीता ही है।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.15.40 
तां समीक्ष्य विशालाक्षीं राजपुत्रीमनिन्दिताम्।
तर्कयामास सीतेति कारणैरुपपादयन्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उस बड़े-बड़े नेत्रों वाली, पतिव्रता और गुणवान राजकुमारी को देखकर उसने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह सीता ही है।
 
Having seen that big-eyed, chaste and virtuous princess, he, by reasoning, ascertained in his mind that she was Sita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)