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ramayan 5.15.4: सुनहरे कमल और कमल के फूलों से भरे कुएँ उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। वहाँ ढेरों चटाईयाँ और कालीन बिछे हुए थे। अनगिनत भूमिगत घर उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.15.4 
काञ्चनोत्पलपद्माभिर्वापीभिरुपशोभिताम्।
बह्वासनकुथोपेतां बहुभूमिगृहायुताम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुनहरे कमल और कमल के फूलों से भरे कुएँ उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। वहाँ ढेरों चटाईयाँ और कालीन बिछे हुए थे। अनगिनत भूमिगत घर उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।
 
The wells filled with golden lotus and lotus flowers were enhancing its beauty. Many mats and carpets were spread there. Numerous underground houses were adding to its beauty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)