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ramayan 5.15.39: अलंकार और स्नान-अभिषेक आदि कर्मों से रहित सीता व्याकरण आदि कर्मों से रहित होने के कारण भिन्न अर्थ वाली वाणी के रूप में पहचानी नहीं जा सकीं। हनुमान जी ने बड़ी कठिनाई से उन्हें पहचाना। 39.   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.15.39 
दु:खेन बुबुधे सीतां हनुमाननलंकृताम्।
संस्कारेण यथा हीनां वाचमर्थान्तरं गताम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अलंकार और स्नान-अभिषेक आदि कर्मों से रहित सीता व्याकरण आदि कर्मों से रहित होने के कारण भिन्न अर्थ वाली वाणी के रूप में पहचानी नहीं जा सकीं। हनुमान जी ने बड़ी कठिनाई से उन्हें पहचाना। 39.
 
Sita, devoid of ornaments and rituals like bathing and anointing, was not recognizable as a voice with a different meaning due to being devoid of rituals related to grammar etc. Hanuman ji recognized her with great difficulty. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)