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ramayan 5.15.38: अभ्यास के अभाव में विस्मृत ज्ञान के समान दुर्बल हुई सीता को देखकर हनुमान की बुद्धि संशयग्रस्त हो गई। 38.   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.15.38 
तस्य संदिदिहे बुद्धिस्तथा सीतां निरीक्ष्य च।
आम्नायानामयोगेन विद्यां प्रशिथिलामिव॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अभ्यास के अभाव में विस्मृत ज्ञान के समान दुर्बल हुई सीता को देखकर हनुमान की बुद्धि संशयग्रस्त हो गई। 38.
 
Seeing Sita weakened like her knowledge which had been forgotten due to lack of practice, Hanuman's intellect became doubtful. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)