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ramayan 5.15.36: उसका चेहरा खुश नहीं था। उसके चेहरे पर आँसू बह रहे थे और उसकी पलकें काली और टेढ़ी लग रही थीं। वह बार-बार गहरी साँसें ले रही थी। 36.   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.15.36 
बाष्पाम्बुपरिपूर्णेन कृष्णवक्राक्षिपक्ष्मणा।
वदनेनाप्रसन्नेन नि:श्वसन्तीं पुन: पुन:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उसका चेहरा खुश नहीं था। उसके चेहरे पर आँसू बह रहे थे और उसकी पलकें काली और टेढ़ी लग रही थीं। वह बार-बार गहरी साँसें ले रही थी। 36.
 
Her face was not happy. Tears were flowing down her face and her eye lids looked black and crooked. She was taking deep breaths again and again. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)