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ramayan 5.15.32: वह बहुत सुंदर नहीं लग रही थी क्योंकि उसने एक विशाल शोक-परिधान ओढ़ा हुआ था। वह धुएँ के गुबार में मिली आग की लौ जैसी लग रही थी। 32.   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.15.32 
शोकजालेन महता विततेन न राजतीम्।
संसक्तां धूमजालेन शिखामिव विभावसो:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वह बहुत सुंदर नहीं लग रही थी क्योंकि उसने एक विशाल शोक-परिधान ओढ़ा हुआ था। वह धुएँ के गुबार में मिली आग की लौ जैसी लग रही थी। 32.
 
She was not looking very beautiful because she was covered with a huge mourning veil. She looked like a flame of fire mixed with a mass of smoke. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)