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ramayan 5.15.30-31: कमलनयनी सीता कामदेव की प्रेमिका रति के समान सुन्दर थीं और पूर्णिमा की प्रभा के समान समस्त जगत को प्रिय थीं। उनका शरीर अत्यंत सुन्दर था। वे एक अनुशासित तपस्विनी की भाँति भूमि पर बैठी रहती थीं। यद्यपि वे स्वभाव से ही डरपोक थीं और चिंता के कारण बार-बार गहरी साँसें लेती थीं, फिर भी वे दूसरों के लिए सर्पिणी के समान भयंकर थीं। 30-31   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  5.15.30-31 
सीतां पद्मपलाशाक्षीं मन्मथस्य रतिं यथा।
इष्टां सर्वस्य जगत: पूर्णचन्द्रप्रभामिव॥ ३०॥
भूमौ सुतनुमासीनां नियतामिव तापसीम्।
नि:श्वासबहुलां भीरुं भुजगेन्द्रवधूमिव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कमलनयनी सीता कामदेव की प्रेमिका रति के समान सुन्दर थीं और पूर्णिमा की प्रभा के समान समस्त जगत को प्रिय थीं। उनका शरीर अत्यंत सुन्दर था। वे एक अनुशासित तपस्विनी की भाँति भूमि पर बैठी रहती थीं। यद्यपि वे स्वभाव से ही डरपोक थीं और चिंता के कारण बार-बार गहरी साँसें लेती थीं, फिर भी वे दूसरों के लिए सर्पिणी के समान भयंकर थीं। 30-31
 
Kamalanayani Sita was as beautiful as Rati, the beloved of Kamadeva, and was loved by the entire world like the radiance of the full moon. Her body was very beautiful. She sat on the ground like a disciplined ascetic. Though she was timid by nature and frequently took deep breaths due to anxiety, she was as fearsome to others as a serpent. 30-31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)