Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.15.3: हिरणों और पक्षियों से भरी हुई वह भूमि नंदन वन के समान सुन्दर प्रतीत हो रही थी; वह मीनारों और राजमहलों से युक्त थी और कोयलों के शोर से भरी हुई प्रतीत हो रही थी। | ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तां स नन्दनसंकाशां मृगपक्षिभिरावृताम्।
हर्म्यप्रासादसम्बाधां कोकिलाकुलनि:स्वनाम्॥ ३॥
अनुवाद
हिरणों और पक्षियों से भरी हुई वह भूमि नंदन वन के समान सुन्दर प्रतीत हो रही थी; वह मीनारों और राजमहलों से युक्त थी और कोयलों के शोर से भरी हुई प्रतीत हो रही थी।
That land, infested with deer and birds, looked as beautiful as the Nandan forest; it was dotted with towers and royal palaces and seemed filled with the noise of the cuckoos.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥