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ramayan 5.15.29: उसके बाल काले थे और होंठ सुपारी के समान लाल थे। उसकी कमर अत्यंत सुंदर थी। उसके सभी अंग सुडौल और सुगठित थे। 29.   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.15.29 
तां नीलकण्ठीं बिम्बोष्ठीं सुमध्यां सुप्रतिष्ठिताम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उसके बाल काले थे और होंठ सुपारी के समान लाल थे। उसकी कमर अत्यंत सुंदर थी। उसके सभी अंग सुडौल और सुगठित थे। 29.
 
His hair was black and his lips were red like the fruit of a betel nut. His waist was very beautiful. All his limbs were well shaped and well built. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)