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ramayan 5.15.27-28h: कल्याणी महिला अब उसी रूप में दिखाई देती है जिस रूप में राक्षस ने, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता है, उस दिन सीता का अपहरण किया था।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  5.15.27-28h 
ह्रियमाणा तदा तेन रक्षसा कामरूपिणा॥ २७॥
यथारूपा हि दृष्टा सा तथारूपेयमंगना।
 
 
अनुवाद
कल्याणी महिला अब उसी रूप में दिखाई देती है जिस रूप में राक्षस ने, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता है, उस दिन सीता का अपहरण किया था।
 
The Kalyani lady is now seen in the same form as the demon, who can assume any form at will, had abducted Sita on that day. 27 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)