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ramayan 5.15.26-27h: वह सुख भोगने में समर्थ थी, किन्तु दुःख से पीड़ित थी। इससे पहले उसने कभी किसी कष्ट का अनुभव नहीं किया था। बड़ी-बड़ी आँखों, अत्यंत मलिन और क्षीण शरीर वाली उस असहाय स्त्री को देखकर हनुमान जी ने युक्तिपूर्वक अनुमान लगाया कि वह सीता है।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  5.15.26-27h 
सुखार्हां दु:खसंतप्तां व्यसनानामकोविदाम्।
तां विलोक्य विशालाक्षीमधिकं मलिनां कृशाम्॥ २६॥
तर्कयामास सीतेति कारणैरुपपादिभि:।
 
 
अनुवाद
वह सुख भोगने में समर्थ थी, किन्तु दुःख से पीड़ित थी। इससे पहले उसने कभी किसी कष्ट का अनुभव नहीं किया था। बड़ी-बड़ी आँखों, अत्यंत मलिन और क्षीण शरीर वाली उस असहाय स्त्री को देखकर हनुमान जी ने युक्तिपूर्वक अनुमान लगाया कि वह सीता है।
 
She was capable of enjoying happiness, but was tormented by sorrow. She had never experienced any troubles before this. Observing that helpless woman with large eyes, extremely dirty and emaciated body, Hanuman Ji, with reasonable reasons, deduced that she was Sita. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)