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ramayan 5.15.22: वह तपस्वी मंगल ग्रह से आक्रांत रोहिणी के समान दुःख और क्लेश से पीड़ित होकर पूर्णतया क्षीण हो रहा था ॥22॥   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.15.22 
पीडितां दु:खसंतप्तां परिक्षीणां तपस्विनीम्।
ग्रहेणांगारकेणेव पीडितामिव रोहिणीम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह तपस्वी मंगल ग्रह से आक्रांत रोहिणी के समान दुःख और क्लेश से पीड़ित होकर पूर्णतया क्षीण हो रहा था ॥22॥
 
That ascetic, like Rohini attacked by the planet Mars, was suffering from grief, distress and was becoming completely emaciated. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)