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ramayan 5.15.21: उसका शरीर एक पीले रंग के पुराने रेशमी वस्त्र से ढका हुआ था। वह मलिन और आभूषणों से रहित होने के कारण कमलों से रहित पुष्करिणी के समान दीन-हीन प्रतीत हो रही थी।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.15.21 
पीतेनैकेन संवीतां क्लिष्टेनोत्तमवाससा।
सपङ्कामनलंकारां विपद्मामिव पद्मिनीम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसका शरीर एक पीले रंग के पुराने रेशमी वस्त्र से ढका हुआ था। वह मलिन और आभूषणों से रहित होने के कारण कमलों से रहित पुष्करिणी के समान दीन-हीन प्रतीत हो रही थी।
 
Her body was covered with a single yellow colored old silken garment. Being dirty and devoid of ornaments, she appeared destitute like a Pushkarini devoid of lotuses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)