Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.15.20: वह अपने रूप से एक सुन्दर चमक बिखेर रही थी, जिसे मैं अपनी स्मृति से अस्पष्ट रूप से पहचान सकती थी, और वह धुएं में लिपटी आग की लौ की तरह दिखाई दे रही थी। | ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अपने रूप से एक सुन्दर चमक बिखेर रही थी, जिसे मैं अपनी स्मृति से अस्पष्ट रूप से पहचान सकती थी, और वह धुएं में लिपटी आग की लौ की तरह दिखाई दे रही थी।
She was radiating a beautiful radiance from her form, which I could vaguely recognise from my memory, and appeared like a flame of fire enveloped in smoke.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥