Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.15.2: वह भूमि कल्पवृक्ष के वृक्षों और लताओं से सुशोभित थी, दिव्य सुगन्ध और दिव्य अमृत से परिपूर्ण थी तथा सब ओर से सुशोभित थी। | ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह भूमि कल्पवृक्ष के वृक्षों और लताओं से सुशोभित थी, दिव्य सुगन्ध और दिव्य अमृत से परिपूर्ण थी तथा सब ओर से सुशोभित थी।
That land was adorned with the trees and creepers of the Kalpavriksha, was filled with divine fragrance and divine nectar and was decorated from all sides. 2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥