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ramayan 5.15.13-15h: सभी ऋतुओं में पुष्पित सुन्दर सुगन्धित वृक्षों से युक्त, तथा भाँति-भाँति के कलरव करने वाले मृगों और पक्षियों से सुशोभित वह उद्यान अत्यंत सुन्दर प्रतीत हो रहा था। अनेक प्रकार की सुगन्धियों का भार वहन करता हुआ वह पवित्र सुगन्ध से परिपूर्ण और सुन्दर प्रतीत हो रहा था। वह अन्य गन्धमादन पर्वत के समान उत्तम सुगन्ध से परिपूर्ण था।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 13-15h
 
 
श्लोक  5.15.13-15h 
सर्वर्तुपुष्पैर्निचितं पादपैर्मधुगन्धिभि:॥ १३॥
नानानिनादैरुद्यानं रम्यं मृगगणद्विजै:।
अनेकगन्धप्रवहं पुण्यगन्धं मनोहरम्॥ १४॥
शैलेन्द्रमिव गन्धाढॺं द्वितीयं गन्धमादनम्।
 
 
अनुवाद
सभी ऋतुओं में पुष्पित सुन्दर सुगन्धित वृक्षों से युक्त, तथा भाँति-भाँति के कलरव करने वाले मृगों और पक्षियों से सुशोभित वह उद्यान अत्यंत सुन्दर प्रतीत हो रहा था। अनेक प्रकार की सुगन्धियों का भार वहन करता हुआ वह पवित्र सुगन्ध से परिपूर्ण और सुन्दर प्रतीत हो रहा था। वह अन्य गन्धमादन पर्वत के समान उत्तम सुगन्ध से परिपूर्ण था।
 
Filled with beautiful fragrant trees blooming in all seasons and adorned with deers and birds chirping in different ways, that garden appeared very beautiful. Bearing the load of many kinds of fragrances, it appeared to be filled with sacred fragrance and beautiful. It was filled with excellent fragrance like the other mountain Gandhamadan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)