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ramayan 5.15.12-13h: वह पुष्परूपी तारों से दूसरे आकाश के समान सुशोभित था और सैकड़ों पुष्परूपी रत्नों से युक्त विचित्र शोभा वाला, पाँचवें समुद्र के समान प्रतीत होता था।   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  5.15.12-13h 
द्वितीयमिव चाकाशं पुष्पज्योतिर्गणायुतम्॥ १२॥
पुष्परत्नशतैश्चित्रं पञ्चमं सागरं यथा।
 
 
अनुवाद
वह पुष्परूपी तारों से दूसरे आकाश के समान सुशोभित था और सैकड़ों पुष्परूपी रत्नों से युक्त विचित्र शोभा वाला, पाँचवें समुद्र के समान प्रतीत होता था।
 
It was decorated like the second sky with flower-like stars and appeared like the fifth ocean, having a strange beauty with hundreds of flower-like gems. 12 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)