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ramayan 5.15.10-11h: वहाँ हजारों अशोक वृक्ष थे, जिनमें से कुछ सोने के समान चमकते थे, कुछ ज्वाला के समान चमकते थे और कुछ काली कालिख के समान चमकते थे॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  5.15.10-11h 
शातकुम्भनिभा: केचित् केचिदग्निशिखप्रभा:॥ १०॥
नीलाञ्जननिभा: केचित् तत्राशोका: सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
वहाँ हजारों अशोक वृक्ष थे, जिनमें से कुछ सोने के समान चमकते थे, कुछ ज्वाला के समान चमकते थे और कुछ काली कालिख के समान चमकते थे॥10 1/2॥
 
There were thousands of Ashoka trees, some of which shone like gold, some glowed like flames and some had the shine of black soot.॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)