श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.14.7 
वृतां नानाविधैर्वृक्षै: पुष्पोपगफलोपगै:।
कोकिलैर्भृङ्गराजैश्च मत्तैर्नित्यनिषेविताम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मदमस्त कोयल और भौंरे अशोक वाटिका का आनन्द ले रहे थे, जो फूलों और फलों से लदे हुए विभिन्न प्रकार के वृक्षों से भरी हुई थी।
 
The intoxicated cuckoos and bumblebees enjoyed the Ashoka garden which was filled with various kinds of trees laden with flowers and fruits. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)