श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.14.50 
तस्याश्चाप्यनुरूपेयमशोकवनिका शुभा।
शुभाया: पार्थिवेन्द्रस्य पत्नी रामस्य सम्मता॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
यह सुन्दर अशोक वाटिका, शुभ सीता के लिए हर प्रकार से उपयुक्त है, जो राजाओं के राजा श्री रामचन्द्र की पूजनीय पत्नी हैं।
 
This beautiful Ashoka grove is suitable in every way for the auspicious Sita who is the respectable wife of the King of Kings, Shri Ramchandra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)