श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.14.39 
तेषां द्रुमाणां प्रभया मेरोरिव महाकपि:।
अमन्यत तदा वीर: काञ्चनोऽस्मीति सर्वत:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन सुमेरु के समान वृक्षों की कांति से वीर वानर हनुमान्‌जी को ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे सब ओर से सोने से आच्छादित हो गए हों ॥39॥
 
At that time, the valiant ape Hanuman felt himself to be covered in gold from all sides due to the radiance of those trees which were like Sumeru. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)