विधूतकेशी युवतिर्यथा मृदितवर्णका।
निपीतशुभदन्तोष्ठी नखैर्दन्तैश्च विक्षता॥ १८॥
तथा लांगूलहस्तैस्तु चरणाभ्यां च मर्दिता।
तथैवाशोकवनिका प्रभग्नवनपादपा॥ १९॥
अनुवाद
उस अशोक वाटिका की दशा उस युवती के समान थी जिसके केश बिखरे हुए थे, श्रृंगार नष्ट हो गया था, जिसके सुन्दर दाँतों वाले ओठ अमृत से चाटे हुए थे और जिसके शरीर के कुछ अंग नख और दाँतों के काटने से चिन्हित थे। वह हनुमान के हाथ, पैर और पूँछ से रौंदी हुई थी और उसके सुन्दर वृक्ष टूटकर गिर गए थे; अतः वह दरिद्र हो गई थी॥18-19॥
The condition of that Ashok Vatika was similar to that of a young girl whose hair was loose, her makeup was gone, her lips with beautiful teeth were licked of nectar and some of her body parts were marked by nail and tooth bites. It had been trampled by Hanuman's hands, feet and tail and its beautiful trees had broken and fallen; hence it had become poor.॥18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥