श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.14.12 
दिश: सर्वाभिधावन्तं वृक्षखण्डगतं कपिम्।
दृष्ट्वा सर्वाणि भूतानि वसन्त इति मेनिरे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाबली हनुमान्‌जी को सब दिशाओं में दौड़ते और वृक्षों पर विचरण करते देखकर सब प्राणी और राक्षस यह मानने लगे कि ऋतुओं के राजा वसन्त ही वानर का वेश धारण करके यहाँ विचरण कर रहे हैं ॥12॥
 
Seeing Hanuman, the great monkey, running in all directions and roaming in the trees, all creatures and demons began to believe that the King of Seasons, Spring itself, was roaming here in the guise of a monkey. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)