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ramayan 5.13.69: यह तुच्छ, नीच, क्रूर और अत्यन्त भयंकर रावण, जिसने आभूषणों से विभूषित होकर और विश्वसनीय वेश धारण करके भी उस अबला तपस्विनी को बलपूर्वक वश में कर लिया है, अब वह मेरे दर्शन में कैसे आ सकती है?॥69॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  5.13.69 
क्षुद्रेण हीनेन नृशंसमूर्तिना
सुदारुणालंकृतवेषधारिणा।
बलाभिभूता ह्यबला तपस्विनी
कथं नु मे दृष्टिपथेऽद्य सा भवेत्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
यह तुच्छ, नीच, क्रूर और अत्यन्त भयंकर रावण, जिसने आभूषणों से विभूषित होकर और विश्वसनीय वेश धारण करके भी उस अबला तपस्विनी को बलपूर्वक वश में कर लिया है, अब वह मेरे दर्शन में कैसे आ सकती है?॥69॥
 
This petty, mean, cruel and extremely dreadful Ravana, who, despite being adorned with ornaments and having assumed a trustworthy garb, has forcibly subjugated that helpless ascetic woman. How can she now come in my sight?'॥ 69॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे त्रयोदश: सर्ग:॥ १३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)