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ramayan 5.13.62: वह पवित्र अशोक वाटिका जल-सिंचन, काँट-छाँट आदि सब प्रकार के अनुष्ठानों से सुशोभित है। वह अन्य वनों से भी घिरी हुई है; अतः उसकी रक्षा के लिए वहाँ बहुत से राक्षस नियुक्त किए गए होंगे॥ 62॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.13.62 
ध्रुवं तु रक्षोबहुला भविष्यति वनाकुला।
अशोकवनिका पुण्या सर्वसंस्कारसंस्कृता॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वह पवित्र अशोक वाटिका जल-सिंचन, काँट-छाँट आदि सब प्रकार के अनुष्ठानों से सुशोभित है। वह अन्य वनों से भी घिरी हुई है; अतः उसकी रक्षा के लिए वहाँ बहुत से राक्षस नियुक्त किए गए होंगे॥ 62॥
 
‘That holy Ashok Vatika has been decorated with all kinds of rituals like watering, pruning, etc. It is surrounded by other forests as well; therefore, many demons must have been deployed there to protect it.॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)