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ramayan 5.13.61: वह वीर पवनपुत्र वानर उस सुन्दर अशोकवन में गया और मन ही मन अपने भावी कर्तव्य का इस प्रकार चिन्तन करने लगा।   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  5.13.61 
स गत्वा मनसा पूर्वमशोकवनिकां शुभाम्।
उत्तरं चिन्तयामास वानरो मारुतात्मज:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
वह वीर पवनपुत्र वानर उस सुन्दर अशोकवन में गया और मन ही मन अपने भावी कर्तव्य का इस प्रकार चिन्तन करने लगा।
 
That brave monkey son of Pawan went to that beautiful Ashoka grove and contemplated about his future duty with his mind in this manner. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)