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ramayan 5.13.6: क्या जनकपुत्री और विदेहवंश की कन्या सीता, जिसका रावण ने बलपूर्वक अपहरण कर लिया था, कभी रावण की सेवा में उपस्थित होने के लिए विवश हो सकती है (यह असम्भव है)?॥6॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.13.6 
किं नु सीताथ वैदेही मैथिली जनकात्मजा।
उपतिष्ठेत विवशा रावणेन हृता बलात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
क्या जनकपुत्री और विदेहवंश की कन्या सीता, जिसका रावण ने बलपूर्वक अपहरण कर लिया था, कभी रावण की सेवा में उपस्थित होने के लिए विवश हो सकती है (यह असम्भव है)?॥6॥
 
Can Sita, the daughter of Janak and daughter of the Videha clan, who was forcibly abducted by Ravana, ever be compelled to present herself in the service of Ravana (this is impossible)? ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)