Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.13.58-59: इस प्रकार दो घण्टे विचार करने के बाद चिन्ता से क्षीण हुई इन्द्रियों वाले महाबाहु पवनदेव हनुमान् सहसा उठ खड़े हुए (और देवताओं को प्रणाम करते हुए बोले -) 'लक्ष्मण सहित श्री रामजी को नमस्कार है। जननन्दिनी सीतादेवी को भी नमस्कार है। रुद्र, इन्द्र, यम और वायुदेवों को नमस्कार है तथा चन्द्रमा, अग्नि और मरुस्थल को भी नमस्कार है। 58-59॥ | ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मुहूर्तमिव ध्यात्वा चिन्ताविग्रथितेन्द्रिय:।
उदतिष्ठन् महाबाहुर्हनूमान् मारुतात्मज:॥ ५८॥
नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय
देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै।
नमोऽस्तु रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यो
नमोऽस्तु चन्द्राग्निमरुद्गणेभ्य:॥ ५९॥
अनुवाद
इस प्रकार दो घण्टे विचार करने के बाद चिन्ता से क्षीण हुई इन्द्रियों वाले महाबाहु पवनदेव हनुमान् सहसा उठ खड़े हुए (और देवताओं को प्रणाम करते हुए बोले -) 'लक्ष्मण सहित श्री रामजी को नमस्कार है। जननन्दिनी सीतादेवी को भी नमस्कार है। रुद्र, इन्द्र, यम और वायुदेवों को नमस्कार है तथा चन्द्रमा, अग्नि और मरुस्थल को भी नमस्कार है। 58-59॥
In this way, after deliberating for two hours, Hanuman, the strong-armed wind-wielder with senses weakened by worry, suddenly stood up (and while saluting the gods, said –) 'Salutations to Shri Ram along with Lakshman. Salutations to Jananandini Sita Devi also. Salutations to the gods Rudra, Indra, Yama and Vayu and also salutations to the moon, fire and desert. 58-59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥