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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना
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श्लोक 52
श्लोक
5.13.52
यावत् सीतां न पश्यामि रामपत्नीं यशस्विनीम्।
तावदेतां पुरीं लंकां विचिनोमि पुन: पुन:॥ ५२॥
अनुवाद
जब तक मैं श्री रामचन्द्रजी की पत्नी सीता को न देख लूँ, तब तक मैं इस लंका नगरी में बार-बार उनकी खोज करूँगा॥ 52॥
Until I see Sita, the wife of the glorious Sri Rama, I will repeatedly search for her in this city of Lanka.॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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