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ramayan 5.13.44: यह लम्बी रात्रि, जिसका प्रारम्भ शुभ है, जो सौभाग्यशाली है, जो यशस्वी है और जो मेरी कीर्ति की माला के समान है, सीता को देखे बिना ही बीत गई।   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.13.44 
सुजातमूला सुभगा कीर्तिमाला यशस्विनी।
प्रभग्ना चिररात्राय मम सीतामपश्यत:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
यह लम्बी रात्रि, जिसका प्रारम्भ शुभ है, जो सौभाग्यशाली है, जो यशस्वी है और जो मेरी कीर्ति की माला के समान है, सीता को देखे बिना ही बीत गई।
 
This long night, whose beginning is auspicious, who is fortunate, glorious and like a garland of my fame, has passed without my seeing Sita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)