इदमप्यृषिभिर्दृष्टं निर्याणमिति मे मति:।
सम्यगाप: प्रवेक्ष्यामि न चेत् पश्यामि जानकीम्॥ ४३॥
अनुवाद
यदि मुझे जानकीजी के दर्शन न हों, तो मैं प्रसन्नतापूर्वक जल-समाधि ले लूँगा। मेरे विचार से जल में प्रवेश करके परलोक जाने का यह मार्ग मुनियों की दृष्टि में भी श्रेष्ठ है॥ 43॥
‘If I do not get to see Janaki, I will happily take jal-samadhi. In my opinion, this way of entering water and going to the other world is the best even in the eyes of sages.॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥