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ramayan 5.13.29: तत्पश्चात् पति से वियोगी, दुःखी, व्यथित और हर्षहीन हुई तपस्विनी रूमा भी आत्महत्या कर लेगी ॥29॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.13.29 
दुर्मना व्यथिता दीना निरानन्दा तपस्विनी।
पीडिता भर्तृशोकेन रुमा त्यक्ष्यति जीवितम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पति से वियोगी, दुःखी, व्यथित और हर्षहीन हुई तपस्विनी रूमा भी आत्महत्या कर लेगी ॥29॥
 
After that, the ascetic Ruma, who is bereaved by her husband, saddened, distressed and devoid of joy, will also commit suicide. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)