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ramayan 5.13.21: ‘तब तो मेरा समुद्र पार करना, लंका में प्रवेश करना और राक्षसों को देखना सब व्यर्थ हो जाएगा।॥21॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.13.21 
ममेदं लङ्घनं व्यर्थं सागरस्य भविष्यति।
प्रवेशश्चैव लंकायां राक्षसानां च दर्शनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘तब तो मेरा समुद्र पार करना, लंका में प्रवेश करना और राक्षसों को देखना सब व्यर्थ हो जाएगा।॥21॥
 
‘Then my crossing the ocean, entering Lanka and seeing the demons will all be in vain.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)