यदि सीतामदृष्ट्वाहं वानरेन्द्रपुरीमित:।
गमिष्यामि तत: को मे पुरुषार्थो भविष्यति॥ २०॥
अनुवाद
(उसने फिर सोचा-) 'यदि मैं सीताजी के दर्शन किए बिना ही यहाँ से वानरराज के धाम किष्किन्धा को लौट जाऊँ, तो मेरे प्रयत्न का क्या अर्थ होगा?॥ 20॥
(He thought again -) 'If I return from here to Kishkinda, the abode of the monkey king, without seeing Sitaji, then what will be the point of my endeavor?॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥