Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.13.20: (उसने फिर सोचा-) ​​'यदि मैं सीताजी के दर्शन किए बिना ही यहाँ से वानरराज के धाम किष्किन्धा को लौट जाऊँ, तो मेरे प्रयत्न का क्या अर्थ होगा?॥ 20॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.13.20 
यदि सीतामदृष्ट्वाहं वानरेन्द्रपुरीमित:।
गमिष्यामि तत: को मे पुरुषार्थो भविष्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
(उसने फिर सोचा-) ​​'यदि मैं सीताजी के दर्शन किए बिना ही यहाँ से वानरराज के धाम किष्किन्धा को लौट जाऊँ, तो मेरे प्रयत्न का क्या अर्थ होगा?॥ 20॥
 
(He thought again -) 'If I return from here to Kishkinda, the abode of the monkey king, without seeing Sitaji, then what will be the point of my endeavor?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)