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ramayan 5.13.11-12: क्या ऐसा हो सकता है कि दुष्ट रावण ने स्वयं ही तपस्वी सीता को खा लिया हो, जो अपने सतीत्व की रक्षा के लिए तत्पर रहने वाले सहायक मित्र की सहायता से वंचित हो गई थी? अथवा क्या ऐसा हो सकता है कि राक्षसराज रावण की पत्नियों ने अपने हृदय में दुष्टता का भाव रखकर काली आँखों वाली धर्मपरायण सीता को अपना आहार बना लिया हो?॥11-12॥   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  5.13.11-12 
आहो क्षुद्रेण चानेन रक्षन्ती शीलमात्मन:।
अबन्धुर्भक्षिता सीता रावणेन तपस्विनी॥ ११॥
अथवा राक्षसेन्द्रस्य पत्नीभिरसितेक्षणा।
अदुष्टा दुष्टभावाभिर्भक्षिता सा भविष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
क्या ऐसा हो सकता है कि दुष्ट रावण ने स्वयं ही तपस्वी सीता को खा लिया हो, जो अपने सतीत्व की रक्षा के लिए तत्पर रहने वाले सहायक मित्र की सहायता से वंचित हो गई थी? अथवा क्या ऐसा हो सकता है कि राक्षसराज रावण की पत्नियों ने अपने हृदय में दुष्टता का भाव रखकर काली आँखों वाली धर्मपरायण सीता को अपना आहार बना लिया हो?॥11-12॥
 
Or could it have happened that the wicked Ravana himself ate the ascetic Sita who was deprived of the help of a helpful friend who was ready to protect her chastity? Or could it be that the wives of the demon king Ravana, having evil intentions in their hearts, made the pious Sita with black eyes their food?॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)