Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.13.1: वानरराज हनुमान अपने विमान से उतरकर महल की प्राचीर पर चढ़ गए और वहाँ वे बादलों की गोद में चमकती बिजली की तरह बड़ी तेजी से विचरण करने लगे।   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.13.1 
विमानात् तु स संक्रम्य प्राकारं हरियूथप:।
हनूमान् वेगवानासीद् यथा विद्युद् घनान्तरे॥ १॥
 
 
अनुवाद
वानरराज हनुमान अपने विमान से उतरकर महल की प्राचीर पर चढ़ गए और वहाँ वे बादलों की गोद में चमकती बिजली की तरह बड़ी तेजी से विचरण करने लगे।
 
Hanuman, the king of the monkeys, descended from his plane and climbed the ramparts of the palace. There he started moving about with great speed like lightning flashing in the lap of a cloud.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)