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श्लोक 5.12.6  |
दृष्टमन्त:पुरं सर्वं दृष्टा रावणयोषित:।
न सीता दृश्यते साध्वी वृथा जातो मम श्रम:॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| मैंने रावण के सम्पूर्ण हरम की खोज की और उसकी सभी पत्नियों को एक-एक करके देखा, किन्तु मुझे पतिव्रता सीता की एक झलक भी नहीं मिली। अतः समुद्र पार करने का मेरा सारा प्रयास व्यर्थ हो गया। |
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| I searched the entire harem of Ravana and saw all his wives one by one, but I did not get a glimpse of the virtuous Sita. Therefore, all my efforts in crossing the ocean went in vain. |
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