श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.12.6 
दृष्टमन्त:पुरं सर्वं दृष्टा रावणयोषित:।
न सीता दृश्यते साध्वी वृथा जातो मम श्रम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैंने रावण के सम्पूर्ण हरम की खोज की और उसकी सभी पत्नियों को एक-एक करके देखा, किन्तु मुझे पतिव्रता सीता की एक झलक भी नहीं मिली। अतः समुद्र पार करने का मेरा सारा प्रयास व्यर्थ हो गया।
 
I searched the entire harem of Ravana and saw all his wives one by one, but I did not get a glimpse of the virtuous Sita. Therefore, all my efforts in crossing the ocean went in vain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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