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श्लोक 5.12.25  |
अवतीर्य विमानाच्च हनूमान् मारुतात्मज:।
चिन्तामुपजगामाथ शोकोपहतचेतन:॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय वायुपुत्र हनुमान अपने विमान से नीचे उतरकर अत्यंत चिंता करने लगे। शोक के कारण उनकी चेतना क्षीण हो गई। |
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| At that time Hanuman, the son of Vayu, came down from his plane and started worrying a lot. His consciousness became weak due to grief. 25. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे द्वादश: सर्ग:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें बारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १२॥ |
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