श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.12.24 
उद्योगं वानरेन्द्राणां प्लवनं सागरस्य च।
व्यर्थं वीक्ष्यानिलसुतश्चिन्तां पुनरुपागत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उन वीर वानर योद्धाओं के प्रयास तथा स्वयं के समुद्र पार करने के प्रयास को व्यर्थ होते देख पवनपुत्र हनुमान पुनः बड़ी चिंता में पड़ गये।
 
Seeing the efforts of those brave monkey warriors and his own crossing of the ocean go in vain, Hanuman, the son of the wind, once again fell into great worry.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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