श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.12.21 
नागकन्या वरारोहा: पूर्णचन्द्रनिभानना:।
दृष्टा हनुमता तत्र न तु सा जनकात्मजा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हनुमान जी ने वहाँ पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर नितंबों और मनोहर मुख वाली अनेक नागकन्याओं को भी देखा; किन्तु उन्हें जनक की पुत्री के दर्शन नहीं हुए।
 
Hanuman ji also saw many snake girls there with beautiful buttocks and charming faces like the full moon; but he did not get the sight of Janaka's daughter.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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